आयुर्वेद (ayurveda) स्वस्थ जीवन का आधार, Acharya balkrishna

रात्रिचर्या

(रात में खान-पान  और आचार-व्यव्हार )

दिन  मिकर 24 घंटो की पूरी अवधि को ही एक दिवस खा जाता अतः रात्रिचर्या भी दिनचर्या का ही एक अंग होता है दिन भर के सभी काम और परिश्रम करने के बाद रात्रि में विश्राम की आवस्य्क्ता होती क्योकि नींद या सोने की किर्या ही रात में आसान अधिक महत्वपूर्ण है अतः रात्रिचर्या में सबसे पहल नींद के विषय में ही जानकारी प्रशतु त करते है

  • नीदं या निंद्रा  :- सभी जानते  है की शरीर को स्वास्थ और स्फूर्तिमान बनाये रखने के लिए ठीक प्रकार नीँद लेना आवश्यक है सारे  दिन के कर्मो को करने के बाद जब  शरीर और मष्तिष्क थक कर निष्किरये  हो जो जाते है तथा ज्यानेन्द्रिया एवं कर्मेन्द्रियाँ  भी थक  जाती है तो  व्यक्ति नींद की अवस्था में आ जाता है इस प्रकार वह  स्थिति जब मन का सम्पर्क ज्यानेन्द्रियो और कर्मेन्द्रियों से टूट जाता है तथा वे एकदम निष्किरये सी  हो जाते है नींद या निंद्रा  कहलाती है नींद की स्थिति में सरीर से स्वास लेना, छोड़ना रक्त संचार आदि बहुत ही महत्वपूरन कार्य ही चलते है.. (इसका नेक्स्ट पार्ट) More आर्टिकल कमिंग SOon 

 

 

 

 

 

 

मनुष्य शरीर की रचना का महत्व…?

  • ईस्वर द्वारा प्रदत इस पांचभौतिक शरीर में तीन चीजों का बहुत बड़ा महत्त्व है

आहार, निद्रा, व ब्रह्मचर्य  

  1.  आहार :- उत्तम स्वास्थ्य के निर्धारक तत्वों में आहार प्रमुख है युक्ति सांगत आहार के बिना स्वास्थ् रहना असंभव है हमारे उपनिषाद आदि में तो आहार को ही जीवन कहा गया है अंन्म वै प्राणाः, वास्तव में आहार स्वम  में एक ओषधि है इससे शरीर के दोष धातु और मालो का प्राणांन का ापुयपन होता है इसके विज्ञानं को जानकर हम अनेक व्यद्धिकीयो को चिकित्षा कर सकते है आहार का प्रभाव केवल शरीर पर ही नहीं मन पर भी सामान रूप से पड़ता है कोकप्रसिद्ध भी है भैया खाये आना वैसा होये मन स्पस्टतः हमारे शरीर व् इन्द्रियों को पुष्ट करता है प्राणो को बलवान बनता और अन्तोगत्वा मन की प्रवतिवायो का भी…..coming soon