Chanakya Niti

चाणक्य नीति Chanakya Niti

 

कौन  थे  चाणक्य ? Who is Chanakya

 

चाणक्य का परिचय :- आचार्य चाणक्य भारतीय इतिहास की अनुपम विभूति थे इसा पूर्व चौथी शताब्दी में यूनान  के राजा सिकंदर ने तथा उनके  सेनापति सेलुकस ने कुछ देशद्रोहियो  की सहायता से भारतवर्ष पर आकर्मण किया था तब तक्षशिला विश्विधालय में दंडनीति (राजनीती ) के महँ आचार्य चाणक्य ने अपने शिष्य चन्द्रगुप्त के नेतृत्व में सैन्यशक्ति संगठित कर विदेशी आक्रांताओ को बुरी तरह पराजित किया था भविष्य में कोई विदेशी आक्रांता भारत की और आँख उठाकर न देख सके, इसलिए क्रांतदर्शी आचार्य ने भारतवर्ष के सभी गणराज्यो को चन्द्रगुप्त के नेतृत्व में संगठित कर इस देश को अखंड एवं शक्तिसम्पन्न भारत राष्ट्र का रूप दिया था

 

Who were Chanakya?
Introduction to Chanakya: – Acharya Chanakya was the unique figure of Indian history. In the 4th century BC, King Sikandar of Greece and his commander Selukas had embarked on India with the help of some treason. Then, in the Taxila University, Principal Chanakya, Chief of Dandi (Politics) Organized a strong force under the leadership of his disciple Chandragupta and defeated the foreign invaders In future no foreign inventions could be seen by India’s eye, so the revolutionary Acharya organized all the Republic of India under the leadership of Chandragupta, making this country a form of unbroken and powerful India.

 

हिमालय से समुद्र पर्यन्त भारतवर्ष एक चक्रवत्री साम्राज्य का क्षत्र है, इस प्राचीन अधरना को गणराज्यो के काल में भी चाणक्य ने प्रतिष्ठापित किया और इस दिशा में विशेष सफलता प्राप्त की उन्होंने सम्राट चन्द्रगुप्त के रूप में देश को एक आदर्श सशक्त दिया और कोतलिये अर्थशात्र के  रूप में युगानुरूप आदर्श शासन व्यवस्था भी देश प्रदान की

विदेशी आक्रान्तो द्वारा भारत को पददलित कर देने पर संक्राति और साहित्य पर बड़ा आघात हुआ था ऐसे उथल – ुप्तल के समय में कोटलए का अर्थशात्र भी लुप्तप्राय (गुमनाम सा) हो गया ठसन १९०५ ईस्वी में तज्जोर (तमिलनाडु) के एक अज्ञातनामा ब्राह्मण ने कौटिल्य अर्थशात्र की एक हस्तलिखित तल्पारीय प्रतिलिपि मैसूर के राजकीय प्राच्य ग्रन्द्थालय में भेट में दी ग्रंथालय के तात्कालीन अध्यदश श्री शमशतृ ने उसका सूक्ष्म अवलोकन किया और यथासम्भव शोधन कर १९०९ ईस्वी में प्रथम बार परस्काषन किया इस ग्रन्थमें वर्णित आर्थिक, सामाजिक राजनितिक, प्रशासनिक एवं नयाव्यवस्थान सम्बद्ध विचारो ने भारत के साथ सतह विकशित मने जाने वाले राष्ट्रों में हलचल मजा दी क्योकि इन तथ्यों से अभी तक लोग अनभिग थे जर्मनी, अमेरिका, इंग्लैंड ल,पूर्व सोवित संघ आदि राष्ट्रों में इस ग्रन्थ का मंथन कर इसके प्रत्यक्ष पक्ष पर अनेक विवेचनात्मक ग्रन्थ लिखे गए है फलईट, जोली आदि विद्वानों ने अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और इसकी महती उपादेयता पर प्रकाश डाला

 

Chhakkya was founded by the Chanakya even during the period of the Republic of Himalaya from the Himalayas to India, Chakkakya is also the region of Chakkvatri Empire, and achieved special success in this direction, he gave the country an ideal empowerment in the form of Emperor Chandragupta, and the form of the classical economics The country also provided the ideal governance system in era
When India was downgraded by foreign invaders, there was a great stroke on Sankranti and literature. In the course of such upheaval, the intricacies of the Kotla were also endangered (Anonymous). In 1905, an anonymous Brahman of Tajjar (Tamil Nadu) gave a handwritten copy of the Kautilya economics in the official oriental library of Mysore. Expected Shri Shamshatri did his subtle observation and did the best possible refinement for the first time in 1990 AD.The economic, social, political, and new-related engagements described in this text have enjoyed a stir with India, which are thought to be surface-wrought, because of these facts, people were unaware of Germany, America, England, former Soviet Union, etc. Several critical treatises have been written on its direct side by churning the text and the writers like Phalit, Joli etc. Told and highlighted its great utility

कोटलिये अर्थशात्र का यह गौरव कुछ दुभवनाग्रस्त पाश्चत्य विद्वानों को बहुत कस्त्दायक लगा और उन्होने इसे जाली सिद्ध करने के लिए बहुत कुछ मनघडंत लिखा एवं प्रचरित किया परन्तु महामहोपाद्यय गणपतिशास्ति आदि भारतीय विद्वानों ने उनका मुहतोड़ जावद दीया और कितलिये अर्थशात्र की अतिहाशिकता एवं प्रमाणिकता को अकाटस्य प्रमाण द्वारा सिद्ध किया

 

This glory of Kotlais economics seemed to be very pleasant to some impotent Western scholars, and they wrote a lot of written and proven to prove it forged, but the great scholars of Mahamahopadhyayya, like Mahamahopadhyayya, gave him a glimpse of the greatness of the economics and the authenticity of authenticity. proved it

 

कौटिल्य अर्थशारस्त्र के  पशियम के कथाकथित भारत विडो में यह धरना व्यक्त थी की प्राचीन भारतीयों का प्रधान चिंतन धारक था, उनका ज्ञान दर्शन एवं धर्म तक सिमित था प्रचिन भारत आर्थिक व् राजनितिक क्षत्र का ज्ञान नगण्य था कौटलीय अर्थशास्त्र उपलब्धि ने इस अवधारणा को खंड खंड कर दिया तह उनके आधार पर निष्पक्ष पाश्यात्य विद्वानों की यह अवधारणा वाणी की भारतीयों दी राजनीतक एवं अर्थक व्यव्य्स्था तथा उनका ातदिष्यक चिंतन विश्व में सर्वाधिक प्राचीन एवं वैज्ञानिक है इस अवधारणा की पुष्टि अत्यंत प्राचीन ऍम प्रामाणिक ग्रन्थ ऋग्वेद, अथर्वेद, रामायण एवं महाभारत आदि से होती है

 

In the story of Pashtun of Pashtun economics, it was expressed in the story of the ancient Indian that it was the chief contemplator of ancient Indians; his knowledge was limited to philosophy and religion. The knowledge of Pranic India’s economic and political field was negligible, the quotational economics achievement made this concept clause. Given folding This concept of neutral savvy scholars based on them is the most ancient and scientific in the world, the political and economic system of their speech and their contemplative thinking is the most ancient and authentic text of Rigveda, Athravad, Ramayana and Mahabharat etc.
जिन परिस्थियों का सामना कौटिल्य ने किया तह, वे आज भी विद्यामन  है भाषा, सम्प्रदाय एवं जाती पर विवाद चिड़ा हुआ है लोग क्षत्रियता के आधार पर बाटे हुए है रात्रीत की भावना चरमरा रही है विदेशीु शक्तिया कुटनीतिपूर्ण उपायों से भारतीय संस्कर्ति समृद्धि एवं गौरव को क्षीण करने में लगी है ऐसी ही परिशतियो में कौटिल्ये ने सम्पूर्ण राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोकर शक्तिसायमपान एवं सरिध बनाने का महनीय कार्य किया था
The circumstances which Kautilya did in the face of the situation, he is still the Vidyamandan, the language is divided on the basis of Kshatriya. The people are divided on the basis of Kshatriya. The spirit of night is getting tired. With the help of alien power and kutaniral measures, Indian culture, prosperity and dignity In such circumstances, in doing so, Kautilya made the whole nation in a form and made the power of making and refining Hniy served

 

अतः कौटिल्य के विचार एवं सिद्धांत की आज आवश्यकता से अधिक प्रांशिक है वस्तुतः कौटिल्ये भारतीय गौरव, स्वाभिमान, पौरष एवं उच्च आदर्शो के प्रतीक है उनके महनिये अवदान युग ुग्गो तक भारतीय सन्तानो में आत्मगौरव एवं राष्ट्रीयता के भाव संचारित करते रहेंगे

 

Therefore, Kautilya’s ideas and principles are more ethical than today’s requirement; virtually, Kautilya is a symbol of pride, dignity, dignity and high ideals, and will continue to transmit the spirit of self-determination and nationalism to the great Indian era.
मोर्युयुग की शासन पढ़ती राजनितिक स्थिति एवं धारक और सामाजिक दशा का सटीक चित्रण कौटलीय अर्थशात्र में मिलता है चाणक्य जहा दण्डनीतित के प्राविता थे, वह वह इसके परव्योक्त भी थे कौटिल्ये अर्थशात्र द्वारा एक ऐसे आदर्श राज्य की कल्पना हमारे समुख प्रस्तुत की गई है, जीका राजा इंद्रजीत राजर्षि है, जिसके मंत्री सर्वोपराध्षुद्ध (सभी गुप्त परीक्षा में खरे उतरो हुए ) है

 

The state of Morayuug reads the political situation and the correct depiction of the status of the holder and the social condition is found in the Kaushalay economics, Chanakya, where there was the ritual of the condemned, it was also the person who was the perpetrator of the Kautilya economics, the imagination of such an ideal state has been presented to us, Jika Raja Indrajit is Rajarshi, whose minister is a supremacy (all have come true)

 

और उसके राजकर्मचारियों को नियुक्ति करते हुए यह परख लिया जाता है की अपने करए के लिए सर्वथा उपयुक्त तथा रात्र के प्रति भातिमान (वभादर) है चाणक्य द्वारा अर्थशात्र में परदपटि ये सिद्धांत आज भी पूर्णतः प्रासंगिक है

 

While applying his servants and it is tested, it is tested that it is absolutely appropriate for his doing and Bhaitiman (Nightingale) for the night. Chanakya, in the economics, these principles of perception are still completely relevant.
प्रस्तुत विवरण में चाणक्य सूत्र अर्थशात्र के अनुभन्ध के रूप में मिलती है इसमें सूत्रों की संख्या ५७९ है इन  राजनीती लोकव्यवहार, धर्म कर्तव्याकर्तव्ये आदि की विषय में बहुत ही उत्तम शिक्षा निहित है यहाँ मै आपको सीधा सरल हिंदी अनुवाद के साथ प्रस्तुत करूँगा इसके साथ ही अंत में अर्थशात्रगत चयनित सुभाषित मिलते है

 

Chanakya formulas come in the form of an explanation of the meaning of the economics in which the number of sources is 579. It is a very good education in the subject of politics, dharma, duties, etc. Here I will present you with a straightforward Hindi translation, with the end Finds the economical selected definitions in
राजा के बारे में आचार्य चाण्यक्य कहते है की शासक को विद्या विनीत एवं जटएंड्रये होना चाहिए, उसे सभी के व्यसनों से सदा दूर रहना चाहिए तथा प्रजाहित को ही सर्वोपरि मन्ना चाहिए तथा वर्णाश्रम धर्म को व्यव्ष्ठित एवं सुदृढ़ करना चाहिए राजा और प्रजा के दवारा स्वधर्म को सर्वाधिक महत्व देना चाहिए दंड व्यव्य्स्था को न अति कठोर और न ही अति मृदु रखना  चाहिए रिश्वतखोर और बेईमानो से प्रजा की रक्षा करनी चाहिए अर्थशुचि ईमानदार एवं भक्तिमान राष्ट्र के प्रति ईमानदार कर्मचारियो को महत्त्व देना चाहिए
इस प्रकार आचार्य चाणक्य का संहिप्त जीवन परिचय है अब आचर्य श्री की नीतियों के बारे में चर्चा करते है

 

About the king, Acharya Chanyakya says that the ruler should have Vidya Vineet and Jatendreya, he should always stay away from the addictions of all, and the people should seek the supreme honor and the Varnashram Dharma should be strengthened and strengthened by the king and the people. The highest priority should be given to the penal system not too harsh or too soft Should protect the people from bribery and dishonesty Honestly honest and honest employees should be given importance to the nation
In this way, Acharya Chanakya has a comprehensive life introduction, now discussions about Acharya’s policies.

 

चाणक्य निति सूत्र 

 

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